रिपोर्ट नरेंद्र सैनी।
– हिमाचल प्रदेश की गौशालाओं में पल रहे गौवंश और गाय संकट में आ गई हैं। पंजाब और हरियाणा से आने वाली तूड़ी की सप्लाई को हिमाचल के बॉर्डर के समीप हरियाणा में रोक दिया गया है। जिससे गौशालाओं और डेयरियों में चारे का संकट पैदा हो गया है। ऐसे में धर्मार्थ गौशाला संचालकों ने जिला और प्रदेश प्रशासन को ज्ञापन देकर व्यवस्था बहाल करने की गुहार लगाई है। हरियाणा प्रशासन ढुलाई के वाहन ओवरलोड होने की दलील देकर वाहनों को अनुमति नहीं दे रहा है।

वीओ – वाहनों के ओवर सीज और ओवरलोडिंग का हवाला देकर हरियाणा प्रशासन ने तूड़ी यानी गेहूं की भूसी की सप्लाई रोक दी गई है। जिसकी वजह से साथ लगते हिमाचल और उत्तराखंड में चारे का संकट पैदा हो गया है। पिछले 15 दिनों से पंजाब और हरियाणा से हिमाचल और उत्तराखंड की तरफ दूरी की सप्लाई बंद है थोड़ी सप्लाई बंद होने से दोनों प्रदेशों में स्थित धर्मार्थ गौशालाओं और देरी उद्योगों सहित घरेलू पशु चारे की भारी किल्लत पैदा हो गई है। दलील दी जा रही है कि थोड़ी सप्लाई करने वाले वाहन ओवर सीज होते हैं और ओवरलोड होते हैं लिहाजा इन वाहनों से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है बताया जा रहा है कि हिमाचल और उत्तराखंड आने वाले वाहनों को अंबाला और यमुनानगर में रोक दिया गया है पांवटा साहिब में धर्मार्थ गौशाला संचालकों ने इस मामले में कड़ा विरोध जताया गौशाला संचालकों ने स्थानीय एसडीएम के माध्यम से जिला और प्रदेश प्रशासन को ज्ञापन भेजा ज्ञापन में मांग की गई है कि हरियाणा प्रशासन से संपर्क करके टुडे की सप्लाई को बहाल करवाया जाए। गोवंश संचालकों ने बताया कि हरियाणा प्रशासन ने इस बार यह व्यवस्था लागू की है। जिसकी वजह से गोवंश चारे का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है गौशाला संचालकों ने आशंका जताई कि गाय और और गोवंश के मुख्य चारे यानी तूड़ी को उद्योगों में ईंधन और एथेनॉल बनाने में उपयोग किया जाने लगा है। जिसकी वजह से तूड़ी के दामों में बढ़ोतरी हो गई है। दूसरी और वाहनों के ओवर सीज और ओवरलोडिंग का हवाला देकर इसकी सप्लाई भी रोक दी गई है। गौशाला संचालकों ने स्पष्ट कर दिया है यदि जल्द भूसे की सप्लाई को बहाल नहीं करवाया गया तो गौशालाओं में बंधे गोवंश को खोलकर प्रशासन के पास भेजने के अलावा और कोई जरिया नहीं
