Saturday, April 18, 2026
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बीजेपी युवा ने बजट को बताया निराशाजनक क्या बोले चौधरी

प्रेस नोट
हिमाचल प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026-27 का बजट प्रदेश की जनता के साथ खुली वादाखिलाफी और कांग्रेस सरकार की विफलताओं का जीवंत प्रमाण बनकर सामने आया है।

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प्रदेश कार्यसमिति सदस्य भाजयुमो हिमाचल प्रदेश चरणजीत चौधरी एवं भाजपा युवा मोर्चा मंडल पांवटा साहिब के अध्यक्ष संयम गुप्ता ने प्रेस जारी करते हुए कहा कि यह बजट न केवल निराशाजनक है, बल्कि प्रदेश को आर्थिक संकट की ओर धकेलने वाला है।

इस बजट का कुल आकार घटाकर 54,928 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पिछले वर्ष के 58,514 करोड़ रुपये से 3,586 करोड़ रुपये कम है।

सरकार द्वारा बजट मे मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री एवं विधायकों के वेतन में कटौती की घोषणा की गई है, किंतु यह कटौती केवल अस्थायी और दिखावटी प्रतीत होती है। इससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति में कोई स्थायी सुधार संभव नहीं है।

चौधरी ने कहा कि यह साफ दर्शाता है कि सरकार के पास न तो कोई आर्थिक दृष्टि है और न ही विकास के लिए कोई ठोस योजना। मुख्यमंत्री द्वारा “मुख्यमंत्री अपना सुखी परिवार” योजना के तहत लगभग 1 लाख परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा की गई है। लेकिन यह वही कांग्रेस है जिसने 2022 के चुनाव में हर परिवार को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया था। अब इसे चुनिंदा परिवारों तक सीमित कर दिया गया है, जो जनता के साथ सीधा विश्वासघात है।

इसी प्रकार, विधानसभा चुनावों के दौरान प्रदेश की हर महिला को ₹1500 प्रतिमाह देने का वादा किया गया था, लेकिन आज इस योजना को शर्तों में जकड़कर सीमित कर दिया गया है।

गुप्ता ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता पाने के लिए झूठे वादों का सहारा लिया और अब जनता को ठगने का काम कर रही है। कृषि क्षेत्र में एमएसपी बढ़ाने की घोषणा जरूर की गई है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों को इसका कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलने वाला।

चौधरी ने कहा कि यह केवल कागजी घोषणा है, जिसका हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है। राज्य सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने को बजट में कटौती का कारण बताया जा रहा है, लेकिन यह सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए बहाने बना रही है।

गुप्ता ने कहा कि यह वित्तीय कुप्रबंधन और दूरदर्शिता की कमी का सीधा उदाहरण है।
1 अप्रैल 2026 से हिमाचल प्रदेश में बाहरी (गैर-हिमाचली) वाहनों के लिए प्रवेश टोल टैक्स में भारी वृद्धि की गई है। निजी कार, जीप और वैन के लिए शुल्क ₹70 से बढ़ाकर ₹170 कर दिया गया है, वहीं 12-सीटर वाहनों के लिए यह ₹110 से बढ़ाकर ₹170 कर दिया गया है। यह निर्णय पूरी तरह से जनविरोधी है। हिमाचल प्रदेश एक पर्यटन आधारित राज्य है और इस तरह टोल टैक्स बढ़ाने से पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आएगी, जिससे पर्यटन पर निर्भर लाखों लोगों की आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा।

चौधरी ने कहा कि होटल व्यवसाय, टैक्सी चालक, छोटे व्यापारी और स्थानीय रोजगार इस गलत निर्णय की कीमत चुकाएंगे, लेकिन कांग्रेस सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
प्रदेश की जनता अब समझ चुकी है कि यह सरकार केवल घोषणाओं और झूठे वादों तक सीमित है, जबकि धरातल पर विकास कार्य पूरी तरह ठप हैं।
यह बजट न तो विकासोन्मुखी है और न ही जनहितकारी, बल्कि यह कांग्रेस सरकार की नाकामी, वादाखिलाफी और जनता के साथ किए गए विश्वासघात का स्पष्ट प्रमाण है।

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